jab tumhe pehli baar dekha shayari

जब तुम्हें पहली बार देखा मैं दिवाना हो गया तेरी अदा पे मैं फिदा हो गया..

तुमको देखा पहली बार

तुम्हारा झुकी नज़रों में शर्माना, मेरी नादानियों पर हल्का सा मुस्कुराना, इन सब से हो रहा था मैं बेकरार, आखिर कर ही दिया अपने प्यार का इकरार..

jab tumhe pehli baar dekha shayari

मैं चाहता था कि उस को गुलाब पेश करूँ, वो ख़ुद गुलाब था उस को गुलाब क्या देता..

तुमको देखा पहली बार

मुझको फिर वही सुहाना नजारा मिल गया, इन आँखों को दीदार तुम्हारा मिल गया, अब किसी और की तमन्ना क्यूँ मैं करूँ, जब मुझे तुम्हारी बाहों का सहारा मिल गया..

तुमको देखा पहली बार

मेरी पसंद तो बन गई तू मैं तेरी पसंद कब बनूंगा, खुदा कसम ये वादा है कोई और आएगा नहीं, पसंद तुम्हें मैं तेरी पसंद जब बनूंगा..

jab tumhe pehli baar dekha shayari

जब तुझे पहली बार देखा था, वो भी था मौसम ए तरब कोई, याद आती है दूर की बातें, प्यार से देखता है जब कोई..

तुमको देखा पहली बार

दिल करता ह जिंदगी तुझे दे दूँ, ज़िंदगी की सारी खुशिया तुझे दे दू, दे दे अगर तू भरोसा अपने साथ के, तो यकीन मान ये सांस भी तुझे दे दूँ..

तुमको देखा पहली बार

पता नहीं मोहब्बत मेरी एक तरफ़ा है, या वो भी दिल से करती है, थोड़ा से देख कर नज़रे चुराती है, या फिर दुनिया से डरती है…

तुमको देखा पहली बार

तेरी खुशबू तेरे आने का पैगम ले आती है, और अभी आए हो फिर जाने की बात न करो, तुम्हारे जाने के साथ मेरी जान ले जाती है...

jab tumhe pehli baar dekha shayari

में तेरी ज़ुल्फ़ों और आँखो में खोया सा रहता हूँ, बस इसी तरह ज़िंदगी को जीना चाहता हूँ..

तुमको देखा पहली बार

तुमसे मोहब्बत करके देखी, ऐसा लगा की जैसा मैंने सब, कुछ पा लिया हो इस जहां में, अब और कुछ करके नहीं देखना..

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तुमको देखा पहली बार

तेरे सीने से लगकर तेरी आरजू बन जाऊँ, तेरी साँसो से मिलकर तेरी खुश्बू बन जाऊँ, फासले ना रहें कोई तेरे मेरे दरमिआँ, मैं…मैं ना रहूँ, बस तू ही तू बन जाऊँ..

तुमको देखा पहली बार

तुम्हारी हर याद मे रहना चाहता हू, तुम्हे हर दिन अपना कहना चाहता हूँ, तुम बस एक दफा हा कह दो, तुम्हारी कसम कोई दूर न कर पायेगा हमे..

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