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गुलज़ार की दर्द भरी शायरी, gulzar shayari zindagi ka ek dard

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gulzar shayari zindagi ka ek dard
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Table of Contents

gulzar shayari zindagi ka ek dard

 

न मेरा एक होगा,

न तेरा लाख होगा,

न तारीफ़ तेरी

 न मेरा मजाक होगा,

गुरूर न कर शाह-ए-शरीर का,

मेरा भी खाक होगा,

 तेरा भी ख़ाक होगा…

***

छोड़ दो ये बहाने

जो तुम करते हो,

हमें भी अच्छे से मालूम है

मज़बूरियाँ तभी आती हैं

ज़ब दिल भर गया हो..

***

shayari zindagi ka ek dard hai

 

एक सपने के टूटकर

चकनाचूर हो जाने के बाद

दूसरा सपना देखने के

हौसले का नाम जिंदगी हैं..

***

देर से गूंजते हैं सन्नाटे,

जैसे हमको पुकारता है कोई

कल का हर वाक़िया था

तुम्हारा  आज की दास्ताँ है हमारी..

***

gulzar shayari zindagi ka ek dard
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ek dard zindagi ka aisa bhi

 

मेरी कोई खता तो साबित कर

जो बुरा हूं तो बुरा साबित कर

तुम्हें चाहा है कितना तू क्या जाने

चल मैं बेवफा ही सही

तू अपनी वफ़ा साबित कर..

 

Meri koi Khata to sabit kar

Jo Bura Hun To Bura sabit kar

Tumhen Chaha Hai Kitna tu kya Jaane

Chal Main Bewafa Hi Sahi

Tu Apni Wafa sabit Kar..

***

गुलज़ार की दर्द भरी शायरी

 

दीवाने तो हम उसे देखकर हुआ करते थे,

मिलना तो बस एक बहाना होता था,

जान छिड़कते थे उसकी अदाओं पर,

बस हमारा शर्माना ही तो प्यार का पैमाना होता था..

***

तुम्हें मोहब्बत कहां थी

तुम्हें तो सिर्फ़ आदत थी

मोहब्बत होती तो हमारा

पल भर का बिछड़ना भी

तुम्हे सुकून से जीने नहीं देता..

***

दर्द भरी शायरी हिंदी में लिखी हुई SMS

 

कोई जिस्म पर अटक गया ,

कोई दिल पर अटक गया

इश्क उसका ही मुकमल हुआ

जो रूह तक पहुच गया..

***

मेरे किरदार से वाकिफ़

होने की कोशिश मत कर

उसे समझने में दिल लगेगा

और तुम दिमाग लगते हो…

***

gulzar shayari zindagi ka ek dard
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gulzar shayari ek dard tanhaiyon ka

 

तन्हाई की दीवारों पर,

 घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,

बेबसी की छत के नीचे,

कोई किसी को भूल रहा हैं..

***

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मेरा हक़ नहीं है तुम पर,

ये जानता हु में,

फिर भी न जाने क्यों,

दुआओ में तुझको मांगना,

अच्छा लगता हे.

Mera hak nahi hai tum par,

Yeh jaanta hun mein,

Phir bhi na jane kyon,

Duao mein tujhko mangna,

Achha lagata he.

***

gulzar shayari zindagi ka ek dard

 

सामने आया मेरे  देखा भी,

बात भी की मुस्कुराए भी,

किसी पहचान की खातिर कल का

अखबार था  बस देख लिया  रख भी दिया..

***

गुलज़ार की दर्द भरी शायरी

 

मैं कभी सिगरेट पीता नहीं

मगर हर आने वाले से पूछ लेता हूँ

कि माचिस है?

बहुत कुछ है जिसे मैं फूँक देना चाहता हूँ.

***

तेरी तरह बेवफा निकले

मेरे घर के आईने भी,

खुद को देखूं

तेरी तस्वीर नजर आती है…

 

Teri Tarah Bewafa Nikale

Mere Ghar Ke Aaine Bhi,

Khud Ko Dekhu

Teri Tasveer Nazar Aati Hai…

***

gulzar shayari zindagi ka ek dard aisa bhi

 

महफ़िल में गले मिल कर

वह धीरे से कह गए,

यह दुनिया की रस्म है,

इसे मुहोब्बत मत समझ लेना.

 

Mahafil Mein Gale Mil kar

Wah Dheere Se Kah Gaye,

Yah Duniya Ki Rasm Hai,

Ise Mohabbt Mat Samajh Lena.

***

गुलजार की शायरी जिंदगी.

 

मेरे दर्द को भी आह का हक़ हैं,

जैसे तेरे हुस्न को निगाह का हक़ है.

मुझे भी एक दिल दिया है भगवान ने.

मुझ नादान को भी एक गुनाह का हक़ हैं.

***

ना इज्जत कम होती ना शान कम होती,

जो बात तुमने घमंड में कहीं हैं,

वो बात हस के बोली होती

तो तुम्हारी खूब तारीफ होती..

***

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